धन लक्ष्मी यंत्र (Dhan Lakshmi Yantra)



धन लक्ष्मी यंत्र (Dhan Lakshmi Yantra)
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श्री धन लक्ष्मी कुबेर यन्त्र

(ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय,

धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।)

धन लक्ष्मी यंत्र – आज संसार का हर प्राणी अपने जीवन में आर्थिक  एवं सामाजिक रूप से समृद्ध होना चाहता है फिर चाहे वो  आर्थिक रूप से सक्षम हो या नहीं हर किसी को अपने जीवन में यश और वैभव की कामना होती है  जैसा की हम जानते है की ये यश और वैभव प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अथक परिश्रम करना  पड़ता है लेकिन कहते है की इसके साथ यदि  किसी व्यक्ति पर धन के स्वामी , देवताओ के कोषाध्यक्ष , देवता कुबेर जी की कृपा बरस जाये तो

“ये वही बात होगी जैसे सोने पर सुहागा”

वो व्यक्ति समाज में एक अलग की मुकाम हासिल कर लेता है तथा जो धन पूर्ति के स्वामी महाराज कुबेर जी की आराधना एवं भक्ति कर उनको प्रसन्न कर लेता है उस व्यक्ति पर  कुबेर महाराज की छत्रछाया पड़ने से भगवान् की सारी ऋद्धिया एवं सिद्धिया स्वतः ही उस व्यक्ति पर प्रसन्न हो जाती है तथा व्यक्ति कीर्तिमान एवं यश वैभव से भरपूर हो जाता है।

कुबेर महाराज जी की कहानी

माना जाता है की ऐश्वर्य, दिव्यता, पद की उन्नत्ति, सुख सौभाग्य, व्यवसाय वृद्धि,  धन वृद्धि, आयु वृद्धि, आर्थिक उन्नत्ति, पारिवारिक सुख, उत्तम स्वास्थ आदि जैसे अनेक सुखमय यश की प्राप्ति करने से सहायक कुबेर जी अपने पहले जनम में भगवान गुणनिद्दि नामक एक वेदय  ब्राह्मण पंडित थे इन्हे कर्म कांड एवं शास्त्रों का पूरा ज्ञान नहीं था तथा फिर भी ये नियमित रूप से अतिथि पूजा,  पैत्रृ पूजा, देव वंदन, आदि जैसे शुद्ध कार्यो को बहुत ही पवित्रता के साथ सम्मप्पन करते थे साथ ही गुणनिद्दि स्वामी अन्य लोगो के प्रति दया सेवा तथा मित्रता का भाव  भी रखते थे ।

लेकिन खराब संगति में पड़ने के कारण ये अपने सभी सदद्गुणो को खोते चले गए यह बात उनकी माँ जानती थी किन्तु उन्होंने अपने पति को  इसकी जानकारी नहीं दी । और वो क्रोध में आकर घर छोड़कर जंगल चले गए ये बात जब गुणनिद्दि  को पता चली तो वो भी  पिता के डर से जंगल में चले गए जंगल में जाने के बाद उन्हें भूक लगी उन्हें सामने एक शिव का मंदिर दिखा रात को जब सभी पुजारी सो गए तब गुणनिद्दि  चुपके से मंदिर में जाकर फलो की चोरी कर के भाग ही रहे थे की  पंडित ने देख लिया और उनका वध कर दिया । उसके बाद जब गुणनिद्दि के प्राणो को यमराज लेने आये तो वहा पर शिवजी आ गए और उनके प्राणो को बचा कर उन्हें अपने धाम कैलाश ले गए वहा भगवान् उनकी भक्ति से प्रसन्न हो गए और उनको आशीर्वाद के तौर पर देवताओ के कोषाध्यक्ष बना दिया तब से गुणनिद्दि महाराज कुबेर के नाम से विख्यात हुए ।

कुबेर महाराज जी मंत्र (Kuber maharaj mantra)

ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥

ये मंत्र कुबेर महाराज की कृपा के साथ साथ माँ लक्ष्मी जो की धन की ही देवी नहीं अपितु  ऐश्वर्य, पद प्रतिष्ठा, संतान सुख,  पारिवारिक सुख, विप्पत्तिया,अष्ट सिद्धि, व्यापारिक सुख  भौतिक सुख, अन्य कई सुखो को प्रदान करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है का भी चमत्कार स्थापित करता है ।

ऐसा शास्त्रों में वर्णन किया गया है की महालक्ष्मी के आठ स्वरुप है। … इन आठ स्वरूपों के रूप में  लक्ष्मी माता  की साधना करने से मानव जीवन सफल  तो होता ही है साथ ही उसके घर की दरिद्रता, अशांति, अपयश, रोग विकार जैसे भौत्तिक दुखो से भी छुटकारा मिलता है।

कुबेर महाराज एवं लक्ष्मी जी को एक साथ पूजने के चमत्कारी लाभ

जैसा की हम जानते है की कुबेर महाराज एवं माँ लक्ष्मी दोनों ही धन और वैभव के कृपालु है किन्तु जब कोई साधक इन दोनों रूपों की  एक साथ पूजा अर्चना करता है तो उस साधक के  सारे  दोष शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, भौत्तिक आदि  विकारो का स्वतः ही निवारण हो जाता है साथ ही उसके अपयश, सारे दोष  परिवर्तित होकर परमसुख में बदल जाते है।

(जैसे केवल एक हाथ से ताली बजाई जाये  तो नहीं  बजती किन्तु दो हाथो को एक साथ जोड़कर ताली बजाई जाये तो वो काफी तेज़ और तीव्र बजती है।)

उसी प्रकार माँ लक्ष्मी और महाराज कुबेर का एक साथ स्मरण किया जाये तो इसका चमत्त्कार इतना सार्थक एवं सकारात्मक होता है की व्यक्ति इन दोनों की कृपा से संसार में अपना अलग ही मुकाम बना पाने में समर्थ हो जाता है।

धन लक्ष्मी यंत्र (Dhan Lakshmi Yantra)

धन लक्ष्मी कुबेर यंत्र (Dhan laxmi kuber yantra)  के फायदे

  1. कुबेर यन्त्र जो की स्वतः अभिमंत्रित होता है धन से सम्बंधित सभी परेशानियों को दूर करता है।
  2. धन लक्ष्मी कुबेर यंत्र (धन लक्ष्मी यंत्र) आपके धन को दूसरों की बुरी नजर से बजा कर संचय करने साथ उसका विस्तार करने में बहुत ही चमत्कारी सिद्ध होता है।
  3. इस यन्त्र की वजह से साधक के आय के मार्ग प्रशष्ट्ट होते है और अनेक मार्गो से धन की प्राप्ति होती है।
  4. व्यापारियों के लिए तो यह यंत्र अत्यधिक लाभकारी एवं कारगर सिद्ध होता है यदि कोई अपना व्यापार खोलने की या नया काम शुरू करने की सोचता है तो उसके लिए तो यह यंत्र किसी चमत्कार से कम नहीं है।
  5. इस यन्त्र के द्वारा कुबेर जी का चमत्कार तो देखने को मिलता ही है साथ ही माँ लक्ष्मी का वास इसे सोने पर सुहागा का रूप दे देती है।
  6. माँ लक्ष्मी और कुबेर जी को एक साथ पूजने से केवल धन ही नहीं अपितु सुख, वैभव, समृद्धि ज्ञान, पारिवारिक कलह का निवारण, संतान उत्त्पत्ति में सहायक, सुख सौभाग्य, अष्ट सिद्धि, नव निद्धि आदि जैसे सुखो के आगमन एवं दुखो के निवारण खुद ही हो जाते है ।
  7. इस यन्त्र का तेज़ इतना ज्यादा होता है की ये अमंगल कार्यो को होने से पहले ही रोक देता है तथा उसे मंगलमय रूप में परिवर्तित कर देता है।

कुबेर लक्ष्मी यन्त्र स्थापित करने के नियम

  1. कहा जाता है की यन्त्र को किसी गुलाबी कपड़े के ऊपर रखना चाहिए  ऐसा करना  मंगलकारी होता है।
  2. यन्त्र कोई सा भी हो बस उसे स्थापित करते समय साधक के मन में उस यन्त्र के प्रति पूर्ण श्रद्धा भक्ति एवं सकारात्मक प्रवृतियों का संचार होना चाहिए ताकि उस यन्त्र को और तेज़ प्राप्त हो सके ऐसा करने पर यन्त्र अपनी शक्ति का प्रदर्शन जल्दी शुरू कर देता है।
  3. यन्त्र स्थापित करने के बाद सात्विकता का पूरा ध्यान रखना चाहिए ऐसा करने से यह मंत्र अधिक ऊर्जावान हो जाता है और अपना असर तीव्र कर देता है।
  4. यन्त्र की स्थापना करने के बाद उसका नियमित रूप से पूजन करना जरुरी है साथ ही अगर गुलाबी रंग के फूलो से यंत्र का पूजन किया जाये तो वास्तु के हिसाब से इसे अत्यधिक मगलकारी माना जाता है।
  5. यन्त्र स्थापित करने के बाद नीचे दिए गए मंत्रो का उच्चारण करना आवयश्क होता है।
  6. यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।
  7. ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्टलक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः
  • मंत्रो का उच्चारण आप किसी भी समय कर सकते है तथा कितनी ही बार कर सकते है ५१ (51) बार, १०८ (108) बार, १५१ (151) बार, और यदि समय की समस्या हो तो अधिक से अधिक ९ (1) बार तो इस मंत्र का उच्चारण करना ही चाहिए बस ध्यान देने वाली बात यह है की उच्चारण पूरी श्रद्धा से किया जाये।

ऐसे ही छोटी छोटी बातो का ध्यान रखकर हम इस महायंत्र का असर और भी चमत्कारी तीव्र एवं सुखमय बना सकते है।

श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं

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