भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (Bhimashankar Jyotirlinga)



भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (Bhimashankar Jyotirlinga)

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग Bhimashankar Jyotirlinga – भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंग में भीमाशंकर का छठा स्थान है। यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। यह समुद्र धरातल से लगभग 3,250 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। भीमाशंकर मंदिर के पास में भीमा नदी बहती है जो आगे जाकर कृष्णा नदी में जाकर मिलती है।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की संरचना

भीमशंकर मंदिर की संरचना प्राचीन वास्तुशिल्पकारों की कौशलता का एक जीता जगता उदहारण है। यह मंदिर नागर शैली की वास्तुकला से बना हुआ है। भीमशंकर मंदिर का शिखर नाना फड़नवीस द्वारा 18वीं सदी में बनाया गया था। नाना फड़नवीस द्वारा मंदिर में हेमादपंथि की संरचना में एक विशाल घंटा बनवाया गया था। जो भीमशंकर मंदिर की एक अलग विशेषता भी है।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार कुंभकरण को कर्कटी नाम की एक महिला पर्वत पर मिली थी। उसे देखकर कुंभकरण उस पर मोहित हो गया और उससे विवाह कर लिया। विवाह के बाद कुंभकरण लंका लौट आया। लेकिन कर्कटी पर्वत पर ही रह गई और उसने एक पुत्र को जन्म दिया  जिसका नाम भीम रखा गया। कहते हैं कि जब श्रीराम ने कुंभकरण का वध कर दिया तो कर्कटी ने अपने पुत्र को देवताओं से दूर रखने का फैसला किया।

बड़े होने पर जब भीम को अपने पिता की मृत्यु का कारण पता चला तो उसने देवताओं से बदला लेने का निश्चय किया। भीम ने ब्रह्मा जी की कठोर  तपस्या करके उनसे वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान प्राप्त करने के पछ्यात वह सभी तरह से जनहानि करने लगा ऋषि मुनियो को भगवान की अराधना करने से रोकने लगा। वह वरदान के मत में चूर हो चूका था।

उस समय एक कामरुपेश्वर नाम के राजा हुआ करते थे, जो भगवान शिव के भक्त थे। एक दिन भीम ने राजा कामरुपेश्वर को भगवान शिव की पूजा करते हुए देख लिया। उसने राजा को भगवान की पूजा छोड़ उसकी पूजा करने के लिए कहा। जब राजा ने उसकी बातो से इंकार किया तो उसने राजा को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया। पंरतु राजा कारागार में भी शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा करने लगे।

जब भीम को इस बात का पता चला, तो उसने तलवार की मदद से राजा के बनाए शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया, ऐसा करने पर शिवलिंग से भगवान शिव प्रकट हो गए और भीम का वध कर दिया।  फिर देवताओं ने भगवान शिव से हमेशा के लिए उसी स्थान पर रहने की प्रार्थना की। देवताओं के कहने पर भगवान शिव उसी स्थान पर शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए। इस स्थान पर भीम से युद्ध करने की वजह से इस ज्योतिर्लिंग का नाम भीमाशंकर पड़ गया।

भीमाशंकर मंदिर के पास के अन्य प्रयटन स्थल

अगर आप भीमशंकर मंदिर जाते हो तो आपको मंदिर के पास और भी मन को मोह देने वाले प्रयटन स्थल मिलेंगे। यह स्थान भगवान शिव के भक्तो के साथ-साथ पर्यटक प्रेमियों के लिए भी बहुत अच्छा है। भीमशंकर लाल वन क्षेत्र और वन्यजीव अभयारण्य द्वारा संरक्षित है जहां आपको पक्षी, जानवर, फूल, पौधे देखने को मिलेंगे।

इसके अलावा भीमशंकर मंदिर के निकट में पर्यटकों और श्रद्धालुओं को हनुमान झील, गुप्त भीमशंकर, भीमा नदी की उत्पत्ति, नागफनी, बॉम्बे प्वाइंट, साक्षी विनायक जैसे स्थानों के दर्शन के का सौभग्य प्राप्त होगा। भीमाशंकर मंदिर के निकट में ही कमलजा मंदिर है। कमलजा पार्वती माता जी का अवतार हैं।

भीमशंकर मंदिर किस समय जाना चाहिए

अगर आप भीमशंकर मंदिर जाने का सोच रहे है तो आप यहाँ साल के किसी भी समय जा सकते है लेकिन सबसे उचित समय अगस्त और फरवरी के बीच का है। यहां श्रद्धालुओं के लिए रुकने के लिए भी हर तरह की व्यवस्था की गई है।

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